म्यंत
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]म्यंत पु † संज्ञा पुं॰ [सं॰ मित्र] दे॰ 'मीत' । उ॰—काल सहाणौं यौं खड़ा, जागि पियारे म्यंत । रांम सनेही बाहिरा तू क्यू सोवै नच्यंत ।—कबीर ग्रं॰, पृ॰ ७२ ।
म्यंत पु † संज्ञा पुं॰ [सं॰ मित्र] दे॰ 'मीत' । उ॰—काल सहाणौं यौं खड़ा, जागि पियारे म्यंत । रांम सनेही बाहिरा तू क्यू सोवै नच्यंत ।—कबीर ग्रं॰, पृ॰ ७२ ।