योगज
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]योगज संज्ञा पुं॰ [सं॰]
१. योगसाधन की वह अवस्था जिसमें योगी में अलौकिक वस्तुओं को प्रत्यक्ष कर दिखलाने की शक्ति आ जाती है । विशेष— युक्त और युंजान दोनों इसी के भेद हैं । यह नैयायिकों के अलौकिक संनिकर्ष के तीन विभागों में से एक है । शेष दो विभाग सामान्य लक्षण और ज्ञान लक्षण हैं ।
२. अगर लकड़ी । अगरु ।