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योगाङ्ग

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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योगांग संज्ञा पुं॰ [सं॰ योगाङ्ग] पतंजलि के अनुसार योग के आठ अंग जो इस प्रकार हैं—यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्या- हार, धारणा, ध्यान और समाधि । इन्हीं के पूर्ण साधन से मनुष्य योगी होता है ।