रतजगा
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]रतजगा संज्ञा पुं॰ [हिं॰ रात + जागना]
१. किसी उत्सव या विहार आदि के लिये सारी रात जागकर बिता देना ।
२. वह आनंदोत्सव जो रात भर होता रहे ।
३. एक त्योहर जो पूर्वी उत्तर प्रदेश तथा बिहार आदि में भाद्रपद कृष्ण द्वितीया की रात को होता है । इसमें प्रायः स्त्रियाँ रात भर कजली आदि गाया करती हैं ।