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रत्नमाला

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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रत्नमाला संज्ञा स्त्री॰ [सं॰]

१. राजा बलि की कन्या । विशेष—वामन भगवान् को देखकर इसके मन में यह कामना हुई थी कि ऐसे बालक को मैं दूध पिलाऊँ । इसीलिये यह कृष्णा- वतार में पूतना हुई थी ।

२. मणियों की माला या हार ।