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रर

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शब्दसागर

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रर पु † ^१ संज्ञा स्त्री॰ [हि॰ ररना] रटना । रट । उ॰—(क) धन सारस होइ रर मुई आप सु मेटही पंख ।—जायसी (शब्द॰) । (ख) झरिया सार तिहिं पर अपार मुख मारू मारू रर ।—सूदन (शब्द॰) ।

रर † ^२ संज्ञा स्त्री॰ [देश॰] वह दीवार जो एक पर एक यों ही बड़े बड़े पत्थर रखकर उठाई गई हो और जिसके पत्थर चूने, गारे आदि से न जोड़े गए हों । (बुंदेल॰) ।