सामग्री पर जाएँ

रसमसा

विक्षनरी से

प्रकाशितकोशों से अर्थ

[सम्पादित करें]

शब्दसागर

[सम्पादित करें]

रसमसा पु वि॰ [हिं॰ रस+मस (अनु॰)] [वि॰ स्त्री॰ रसमसी]

१. रंग से मस्त । आनंदमग्न । अनुरक्त । उ॰— खेलत अति रसमसे लाल रँग भीने हो । अतिरस केलि विशाल लाल रँगभीने हो ।— सूर (शब्द॰) ।

२. तर । गीला । उ॰— दलदल जो हो रही है हरेक जा पै रसमसी । रस मर मिटा है मर्द तो औरत कहीं फँसी ।— —नजीर (शब्द॰) ।

३. पसीने से भरा । आंत ।