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रसमैत्री

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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रसमैत्री संज्ञा स्त्री॰ [सं॰]

१. दो ऐसे रसों का मिलना जिनके मिलने से स्वाद में वृद्धि हो । दो रसों का उपयुक्त मेल । जैसे,— कड़ुआ और तीता; तीता और नमकीन; नमकीन और खट्टा आदि ।

२. साहित्य में रसों का उपयुक्त मेल ।