रसराज
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]रसराज संज्ञा पुं॰ [सं॰]
१. पारद । पारा । उ॰— रावन सो रसराज सुभट रस रहित लंक खल दलती । —तुलसी (शब्द॰) ।
२. रसों का राजा, श्रृंगार रस । उ॰— जनु विधुमुख छबि अमिय को रछक रख्यो रसराज । —तुलसी (शब्द॰) ।
३. वैद्यक में एक प्रकरा की औषधि जो तांबे के भस्म, गंधक और पारे को मिलाकर बनाई जाती है और जिसका व्यवहार तिल्ली और बरवट आदि में होता है ।
४. रसांजन । रसौत ।