रसांजन
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आँख तेजोमय(अग्नि रूप)है। इसलिए आँख को शरीर में विद्यमान त्रिदोष वात पित्त और कफ इनसे भय बना रहता है। इसमें भी विशेष कर कफ से,इसलिए तीक्ष्ण अंजन(रसांजन) रात्री में वैद्य के उचित परार्मश से लगाना चाहिए।
प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]रसांजन संज्ञा पुं॰ [सं॰ रसाञ्जन] रसौत । रसवत ।