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रसेश्वर

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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रसेश्वर संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. पारा ।

१. एक दर्शन का नाम जो छह दर्शनों में नहीं है । विशेष— इस दर्शन में पारे को शिव का वीर्य ओर गंधक को पार्वती का रज माना है । इनके १८ संस्कार लिखे है और इनक े उपयोग से व्याधिनाश, जीवनदान और खेचरत्वादि माना है । इनके दर्शन और स्पर्श में महापुण्य वतलाया है ओर कहा गया है कि शरीर का आरोग्य होना परमावश्यक है, क्योंकि शरीर के बिना पुरुषार्थ नही हो सकता; और पुरुषार्थ के बिना मोक्ष की प्राप्ति असंभव है ।

३. एक रसौषध जो पारे, गंधक, हरताल, और सोने आदि के योग से तैयार होती है ।