राक्षस
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संज्ञा
[सम्पादित करें]राक्षस
- हिन्दू पुराणों में वर्णित एक प्रकार का असुर या दैत्य, जो क्रूर और अधर्मी होता है।
- अत्याचारी, निर्दयी या क्रूर व्यक्ति (रूपक अर्थ में)।
उच्चारण
[सम्पादित करें]उदाहरण वाक्य
[सम्पादित करें]- रामायण में रावण को राक्षस कहा गया है।
- जो दूसरों पर अत्याचार करता है, वह राक्षस जैसा होता है।
प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]राक्षस संज्ञा पुं॰ [सं॰] [स्त्री॰ राक्षसी]
१. निशाचर । दैत्य । असुर ।
२. कुबेर के धनकोश के रक्षक ।
३. कोई दुष्ट प्राणी ।
४. साठ संवत्सरों में से उनचासवाँ संवत् ।
५. वैद्यक में एक रस जो पारे और गंधक के योग से बनता है । विशेष—यह रस पेट की बादी दूर करता और भूख बढ़ाता है ।
६. एक प्रकार का विवाह जिसमें कन्या के लिये युद्ध करना पड़ता है । यौ॰—राक्षस विवाह=विवाह का एक प्रकार जिसमें युद्ध में कन्या का हरण करके बिवाह करते हैं । जैसे,—कृष्ण रुकिमणी और पृथ्वीराज संयोगिता का बिवाह ।
७. ज्योतिष में एक योग का नाम (को॰) ।
८. तीसवाँ मुहूर्त (को॰) ।
९. राजा नंद का एक अमात्य ब्राह्मण जो कूटनीति कै बहुत बड़ा ज्ञाता था ।