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रागिनी

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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रागिनी संज्ञा स्त्री॰ [सं॰]

१. विदग्धा स्त्री ।

२. मैना की बड़ी कन्या का नाम ।

३. जयश्री नाम की लक्ष्मी ।

४. संगीत में किसी राग की पत्नी या स्त्री । दे॰ 'राग' । विशेष—हनुमत और भरत के मत से प्रत्येक राग की पाँच पाच रागिनियाँ और सोमेश्वर आदि के मत से छह छह रागिनियाँ हैं । परंतु साधारणतः लोक में छह रागों की छत्तीस रागिनियाँ ही मानी जाती हैं । इस अंतिम मत के अनुसार प्रत्येक राग की रागिनियाँ इस प्रकार हैं । श्रीराग की भार्याएँ या रागिनियाँ—पालश्री, त्रिवणी, गौरी, केदारी, मधुमाधवी और पहाड़ी । वसंत राग की रागिनियाँ— देशी, देवगिरि, बैराटी, टौरिका, ललिता और हिंडोल । पंचम राग की रागिनियाँ—विभास, भूपाली, कर्णाटी, पठहंसिका, मालवी, और पटमंजरी । भैरव राग की रागिनियाँ—भैरवी, र्बगाली, सैंधवी, रामकेली, गुर्जरी और गुणकली । मेघ राग की रागिनियाँ—मल्लारी, सौरटी, सावेरी, कौशिकी, गांधारी और हरश्रृगार । नटनारायण राग की रागिनियाँ—कामोदी, कल्याणी, आभीरी, नाटिका, सारंगा और हम्मोरी । अन्य मत से रागों की रागिनियाँ इस प्रकार हैं । भैरव—मध्यमादि (मधुमाधवी), भैरवी, बगाली, वरारी और सैंधवो । मालकोस— टीड़ी, खंबावती, गौरी, गुणकरी और ककुमा । हिडोल— बिलावती, रामकली, देसाख, पटमंजरी और लालत । दीपक— केदारी, करणाटी, देसी टौड़ी, कामोदी और नट । श्री—वसंत, मालवी, मालश्री, असावरी और धनाश्री । मेघ—गौड़मल्लारी, देसकार, भूपाली, गुर्जरी और श्रीरंक । कुछ लोगों के मत से रागिनियों के उक्त नामों में मतभेद भी है । इन छतीस रागिनियों के अतिरिक्त और भी सैकड़ों रागिनियाँ हैं, जो प्रायः कई रागों और रागिनियों के मेल से बनती हैं, और जिन्हें संकर रागिनी कहते हैं ।