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राछ

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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राछ संज्ञा पुं॰ [सं॰ रक्ष]

१. कारीगरों का औजार । उ॰— क्या गुरु कोई घर का राछ है कि भला मिलो चाहै बुरा, परंतु प्राणी को अवश्य बना हो छोड़ना चाहिए ।—श्रद्धाराम (शब्द॰) ।

२. लकड़ी के अंदर का पक्का अंश । हीर ।

३. जुलाहों के करघे में एक औजार जिसमें ताने का तागा ऊपर नीचे उठता और गिरता है । कंघी । विशेष—वह दो नरसलों का होता है जिसके बीच में ऊपर नीचे तागे बँधे होते हैं और जिनके बीच से ताने के तागे एक एक करके निकल जाते हैं ।

४. बारात । जलूस । क्रि॰ प्र॰—निकलना ।—फिरना । मुहा॰—राछ घुमाना = विवाह में वर को पालकी पर चढ़ाकर किसी जलाशय या कूएँ की परिक्रमा कराना ।

५. चक्की के बीच का खूँटा जिसक चारों ओर ऊपर का पाट फिरता है ।

६. लोहार का बड़ा हथौड़ा ।