राजना
दिखावट
प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]राजना पु क्रि॰ अ॰ [सं॰ राजन (= शोभित होना)]
१. विरा- जना । उपस्थित होना । रहना । उ॰ —(क) कीन्हो केलि बहुत बल मोहन भुव को भार उतारेउ । प्रगट ब्रह्म राजत द्वारावति बेद पुरान उचारेउ ।— सूर (शब्द॰) । (ख) मंदिर महँ सब राजहिं रानी । सोभा शील तेज की खानी ।—तुलसी (शब्द॰) । (ग) पुरुजित अरु पुरुभित्र महीप । राज्यो रन रथ दारे समीप ।— गोपाल (शब्द॰) ।
२. शोभित होना । सोहना । उ॰— (क) आय जगदीश्वर ह्वै जग में विराजमान, हौं हू तो कवीश्वर ह्वै रजतै रहत हौं ।— पद्माकर (शब्द॰) । (ख) बहु राजत है गजराज बड़े । नभ आडत बिद्ध मनो उमड़े ।—गुमान (शब्द॰) । (ग) वा दिन भाजे मुखन की, तुम नासी मुसुकाइ । ते राजि यह सुनि उठी, सुमना सी विकसाइ ।—श्रृं॰ सं॰ (शब्द॰) ।