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राजपटोल

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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राजपटोल संज्ञा पुं॰ [सं॰] एक प्रकार का पटोल या परवल । विशेष— इसके फल बड़े होते हैं । फागुन चैत के महीनों में इसकी डालियाँ काटकर खेतों में दो दो हाथ की दूर पर पंक्तियों में नाली खोदकर लगाई जाती हैं और उनमें पानी दिया जाता है । यह वैसाख जेठ से फूलने लगता है और इसकी फसल वर्षा ऋतु के मध्य तक रहती है । फल देखने में लबें, बड़े और खाने में कुछ कम स्वादिष्ट होते हैं । इसे प्रति वर्ष खेतों में लगाने की आवश्यकता होती है । विहार प्रांत में इसकी खेती आधिक होती है । इसे पूरबी या पटने का (पटनहिया) परवल भी कहते हैं ।