राजमृगाङ्क
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]राजमृगांक संज्ञा पुं॰ [सं॰ राजमृगाङ्क] एक मिश्र रस का नाम जो यक्ष्मा रोग में दिया जाता है । विशोष— इसके बनाने की विधि यह है— सोने को उतनी ही चाँदी, और उससे दूने मैनशिल, गंधक, हरताल तथा तिगुने रससिंदूर के साथ मिलाकर एक कौड़ी में भर देते हैं । फिर बकरी के दूध में सुहागा पीसकर उससे कैड़ी का मुँह बंद कर देते हैं । फिर उसे मिट्टी के बरतन में भरकर गजपुट से फूँक देते हैं । ठंढा होने पर उसे निकालकर पीस डालते हैं । कुछ लोग चाँदी की यह रस बनाते हैं । यह रस चार रत्ती की मात्रा में खाया जाता है । इसका अनुपान घो, मधु या पीपल और मिर्च है ।