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राजयोग

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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राजयोग संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. वह प्राचीन योग जिसका उपदेश पतंजलि ने योगशास्त्र में किया है । विशोष— इसमें यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि नामक अष्टांग का यथाक्रम अभ्यास किया जाता है । इसे अष्टांग योग भी कहते हैं । विशेष दे॰ 'योग' ।

२. फलित ज्योतिष के अनुसार ग्रहों का ऐसा योग जिसके जन्म- कुंड़ली में पड़ने से मनुष्य राजा या राजा के तुल्य होता है । विशोष— यवनाचार्य के मत से पापग्रहों का जन्मसमय स्वस्थान- भागी होकर सूच्च होना राजयोग है । पर जीवशर्मा का मन है कि मंगल, शनि, सूर्य और बृहस्पति में से किसी तीन ग्रहों का अपने स्थान में सूच्च पड़ना राजयोग है ।