रामानंद
प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]रामानंद संज्ञा पुं॰ [सं॰ रामानन्द] एक प्रसिद्ध वैष्णव आचार्य जिनका चलाया हुआ 'रामावत' नामक संप्रदाय अबतक प्रच- लित हैं । विशएष—रामानंद जी का जन्म सं॰ १३५६ ई॰ में प्रयाग में पुण्यसदन या भूरिकर्मा नामक एक कान्यकुब्ज ब्राह्मण के घर हुआ था । पहले इनका नाम रामदत्त था । बाल्यावस्था में इनकी बुद्धि बड़ी तीव्र थी । कहते है, बारह वर्ष की अवस्था में ही ये सब शास्त्र पढ़कर पूर्ण पंडित हो गए थे और दर्शन शास्त्र का विशेष रूप से अध्यंयन करने के लिये काशी चले आए थे । पहल े ये एक स्मार्त अध्यापक से पढ़ने लगे । एक दिन रामानुज की शिष्यपरंपरा के राघवानंद से इनकी भेंट हुई जिन्होंने इन्हें देखकर कहा कि तुम्हारी आयु बहुत थोड़ी है और तुम अभी तक हरि की शरण में नहीं आए हो । इसरपर ये राघवानंद से मंत्र लेकर उनके शिष्य हो गए और उनसे योग सीखने लगे । उसी समय इनका नाम रामानंद रखा गया । इनके समय में प्रायः सारे भारत में मुसलमानों के अनेक प्रकार के अत्याचार हुए थे, जिन्हें देखकर इन्होंने जाति पाँति का बंधन कुछ ढीला करना चाहा; और सबको राम नाम के महामंत्र का उपदेश देकर अपने 'रामावत' संप्रदाय में संमिलित करना आरंभ किया । रामानुज के श्रीवैष्णव संप्रदाय की संकुचित सीमा तोड़कर इन्होंने उसे अधिक विस्तृत तथा उदार बनाया था । इनका शरीरांत सं॰, १४६७ में हुआ था । इनके मुख्य शिष्यों में पीपा, कबीर, सेना, धना, रैदास आदि हैं ।