रास्य
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]रास्य संज्ञा पुं॰ [सं॰] प्राचीन काल का एक पात्र जिसमें यज्ञ के समय घी रखकर दान किया जाता था ।
रास्य संज्ञा पुं॰ [सं॰] श्रीकृष्ण ।
रास्य संज्ञा पुं॰ [सं॰] प्राचीन काल का एक पात्र जिसमें यज्ञ के समय घी रखकर दान किया जाता था ।
रास्य संज्ञा पुं॰ [सं॰] श्रीकृष्ण ।