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रिंगाना

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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रिंगाना पु † क्रि॰ स॰ [सं॰ रिंगण] रेंगने की क्रिया कराना । रेंगना । उ॰—सुनतहि बचन माथ तब नाई । तब भीतर कहँ दीन्ह रिंगाई ।—कबीर सा॰, पृ॰ २५६ ।

२. धीरे धीरे चलाना ।

३. घुमाना । फिराना । दौड़ाना । चलाना । (बच्चों के लिये ) । उ॰—में पठवति अपने लरिका को आवइ मन बहराइ । सूर श्याम मेरो अति बालक मारत ताहि रिंगाइ ।— सूर (शब्द॰) । संयो॰ क्रि॰—देना ।