रेल

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

रेल ^१ संज्ञा स्त्री॰ [अं॰]

१. सड़क की वह लोहे की पटरी जिसपर रेलगाड़ी के पहिए चलते हैं ।

२. भाप के जोर से चलनेवाली गाड़ी । रेलगाड़ी । विशेष—भाप के इंजन से चलनेवाली गाड़ी का आविष्कार पहले पहल सन् १८०२ ई॰ में इंगलैंड में हुआ । तब से इसका प्रचार बहुत बढ़ता गया, यहाँ तक कि अब वृथ्वी पर बहुत कम ऐसे सभ्य देश हैं जिनमें रेलगाड़ी न हों । यौ॰—रेल इंजिन = रेलगाड़ी चलाने का यंत्र या मशीन । रेलगाड़ी = दे॰ 'रेल' । रेलमंत्री = रेल महकमा का सर्वोच्च मंत्री । रेलवे ।

रेल ^२ संज्ञा स्त्री॰ [हिं॰ रेलना]

१. बहाव । धारा । उ॰—भूषण भनत जाके एक एक शिखर ते केते धौं नदी नद की रेल उतरति है ।—भूषण (शब्द॰) ।

२. अधिक्य । भरमार । उ॰—सधन कुंज में अमित केलि लखि तनु सुगंध की रेल ।—सूर (शब्द॰) । यौ॰—रेल ठेल । रेल पेल ।

रेल ठल संज्ञा स्त्री॰ [हिं॰] दे॰ 'रेलपेल' । उ॰—कहै पदमाकर हमेसा दिव्य बीथिन मो बानन की रेलठेल ठेलन ठिलति है ।— पदमाकर (शब्द॰) ।

रेल पेल [हिं॰ रेलना + पेलना]

१. भीड़ जिसमें लोग एक दूसरे को धक्का देते हैं ।

२. भरमार । अधिकता । ज्यादति ।