लँगोटी

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

लँगोटी संज्ञा स्त्री॰ [हिं॰ लँगोट + ई (प्रत्य॰)] कोषीन । कछनी । भगई । उ॰—रोटी गहे हाथ में सुचाटी गुहे माथ में, लँगोटी कछे नाथ साथ बालक बिलासी है ।—(शब्द॰) । मुहा॰—लँगोटिया यार = बचपन का मित्र । उस समय का मित्र, जब कि दोनों लँगोटी बाँधकर फिरते हों । लँगोटी पर फाग खेलना = थोड़ा हा साधन होने पर भी विलासी होना । कम सामर्थ्य होने पर भी बहुत अधिक व्यय करना । लँगोटी बँध- वाना = बहुत दरिद्र कर देना । इतना धनहीन कर देना कि पास में लँगोटी के सिवा और कुछ न रह जाय । लँगोटी बिकवाना = इतना दरिद्र कर देना कि पहनने के वस्त्र तक न रह जाँय ।