लकुलीश

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

लकुलीश संज्ञा पुं॰ [सं॰] एक शैव संप्रदाय और उसके प्रवर्तक आचार्य का नाम । विशेष—लकुलीश वा नकुलीश संप्रदाय के प्रवर्तक लकुलीश माने जाते हैं । लिंगपुराण (२४ ।१३१) में उनके मुख्य चार शिष्यों के नाम कुशिक, गर्ग, मित्र और कौरुष्य मिलते हैं । प्राचीन- काल में इसके अनुयायी बहुत थे, जिनमें मुख्य साधु (कनफटे, नाथ) होते थे । इस संप्रदाय का विशेष वृत्तांत शिलालेखों तथा विष्णुपुराण, लिंगपुराण आदि में मिलता है । इसके अनुयायी लकुलीश को शिव का अवतार मानते और उनका उत्पत्तिस्थान कायावरोहण (कायारोहण, कारवान्, बड़ौदा राज्य में) बतलाते थे । (विस्तृत विवरण के लिये देखें उदयपुर राज्य का इतिहास, पृ॰ ४१५ ।