लरनि
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]लरनि पु सज्ञा स्त्री॰ [हिं॰ लड़ना]
१. युद्ध लड़ाई । उ॰—मेरे जिय इहई साच पर् यो । मन के ढग सुनो री सजनी जैसे, मीहिं निदर् यो । आपुनि गयो सग संग लीन्हें प्रयमहिं इहै कर् यो । मो सो बर प्राति करि हर सों ऐसी लरनि लर् यो । ज्यों त्यां नन रहे लपटनि तिनहूँ भेद भर् यो । सुनहु सूर अ नाइ इनहुँ का अब ला रहो डरयो ।—सूर (शब्द॰) ।
२. युद्ध करने का ढंग । लड़ने का ढक । उ॰— लामी लूम लसत लपेटि पटकत भट, देखा देखो लखन लरनि हनुमान की ।—तुलसी (शब्द॰) ।