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लरी

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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लरी संज्ञा स्त्री॰ [प्रा॰ लठ्ठि] दे॰ 'लड़ी' । उ॰—(क) चंपक बरन चरन करि कमलनि दाड़िम दशन लरी । गति मराल अरु बिंव अधर छवि अहि अनूप कवरी । अति करुना रघुनाथ गुसाईं युग भर जात घरी ।—सूरदास प्रभु प्रिया प्रेमवस निज महिमा बिसरी—सूर (शब्द॰) । (ख) कबिरा मोतिन की लरी हीरन को परगाम । चाँद सुरुज को गम नहीं तहं दरसन पावै दास ।—कबीर (शब्द॰) ।