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लाटानुप्रास

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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लाटानुप्रास संज्ञा पुं॰ [सं॰] वह शब्दालकार जिसमें शब्दों की पुन- रुक्ति तो होती है, परंतु अन्वय में हेरफेर करने से तात्पर्य भिन्न हो जाता है । जैसे,—पीय निकट जाके नहीं, धाम चाँदनी ताहि । पीय निकट जाके, नहीं घाम चाँदनी ताहि । दे॰ 'लाट ^४—३' ।