लाय
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]लाय पु संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ अलात, प्रा॰ अलाय]
१. लपट । ज्वाला
२. आग । अग्नि । उ॰—कबीर चित चंचल किया चहुँ दिसि लागी लाय । हरि सुमिरन हाथें घड़ा लीजे वेगि बुझाय ।— कबीर (शब्द॰) ।