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लावना

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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लावना ^१—पु † क्रि॰ स॰ [हिं॰ लाना] । उ॰—(क) विप्र कह्मौ धन लावनो करन सुता को ब्याह । यहि थल चोर चुराय लिए भयो भोर दुख दाह ।—रघुराज (शब्द॰) । (ख) जाहि अधप पापी हम चीन्हा । तेहि तब ढिग लावन मन कीन्हा । विश्राश्र (शब्द॰) । (ग) कीन्हेसि मधु लावइ लेइ माखी । कीन्हेसि भँवर पंखि अरु पाँखी ।—जायसी (शब्द॰) ।

लावना क्रि॰ स॰ [हिं॰ लगाना]

१. लगाना । स्पर्श कराना । उ॰—(क) लावत मैन सुगध लख्यौ सब सौरभ की तन देत दसी है ।—रघुनाथ (शब्द॰) । (ख) तुलसिदास कह रूप देखावहु । मेरे शीश पानि निज लावहु ।—रघुराज (शब्द॰) । (ग) मेरे अंग सहत सुगंध सो सही है सदा लाबन न देन और ऐसे हैं सुधर्मी ।—रघुनाथ (शब्द॰) । (घ) सो मोहि लेइ मँगावई लावइ भूख पिआस । जउँन होत अस बइरी केहि काहू कर आस ।—जायसी (शब्द॰) ।

२. जलाना । आग लगाना । उ॰—बहुरि इंद्रजित ब्रह्मअस्त्रकृत हनुमत बंधन गायो । सभागमन रावण समुझावन लावन लक गनायो ।—रघुराज (शब्द॰) ।