लावा

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

लावा ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰ लाबक] लबा नामक पक्षी । विशेष दे॰ 'लवा' । उ॰—गयउ सहमि नहिं कछु कहि आवा । जनु सचान वन झाटेउ लाबा ।—तुलसी (शब्द॰) ।

लावा ^२ संज्ञा पुं॰ [सं॰ लाजा] भूना हुआ धान, ज्वार, बाजरा या रामदाना आदि जो भुनने के कारण फूलकर फूट जाता है और जिसके अंदर से सफेद गूदा बाहर निकल आता है । यह बहुत हलका और पथ्य समझा जाता है और प्रायः रोगियों को दिया जाता है । खील । लाई । फुल्ला । क्रि॰ प्र॰—फूटना ।—भूनना । यौ॰—लावा परछन ।

लावा ^३ संज्ञा पुं॰ [अं॰] राख, पत्थर और धातु आदि मिला हुआ वह द्रव पदार्थ जो प्रायः ज्वालामुखी पर्वतों के मुख से विस्फोट होने पर निकलता है ।

लावा परछन संज्ञा पुं॰ [हि॰ लावा + परछना] विवाह के समय की एक रीति । विशेष—इसमें वर के आगे कन्या खड़ी की जाती है और उसके हाथ में एक डलिया दी जाती है । कन्या का भाई उसी डलिया में धान का लावा डालता है । हवन और सप्तपदी इसके बाद होती है ।