लिलार
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]लिलार पु † संज्ञा पुं॰ [सं॰ ललाट]
१. भाल । माथा । मस्तक । उ॰—लेखनि लिलार की परेखनि मुरति है ।—घनानंद, पृ॰ २३ ।
२. कूएँ का वह सिरा जहाँ मोट का पानी उलटते हैं ।
लिलार पु † संज्ञा पुं॰ [सं॰ ललाट]
१. भाल । माथा । मस्तक । उ॰—लेखनि लिलार की परेखनि मुरति है ।—घनानंद, पृ॰ २३ ।
२. कूएँ का वह सिरा जहाँ मोट का पानी उलटते हैं ।