लिहाज
प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]लिहाज संज्ञा स्त्री॰ [अ॰ लिहाज]
१. व्यवहार या बरताव से किसी बात का ध्यान । कोई काम करते हुए उसके संबंध में किसी बात का ख्याल । जैसे,—(क) उसकी तंदुरुस्ती के लिहाज से मैंने उसे हलका काम दिया । (ख) दवा में मैंने खाँसी का लिहाज भी रखा है । क्रि॰ प्र॰—करना ।—रखना ।
२. कृपापूर्वक किसी बात का ध्यान । मेहरबानी का खयाल । कृपादृष्टि ।
३. किसी को कोई बाते अप्रिय या दुःखदायी न हो, इस बात का खयाल । मुरव्वत । मुलाहजा । शील संकोच । जैसे,—काम बिगड़ने पर वह कुछ भी लिहाज न करेगा ।
४. पक्षपात । तरफदारी ।
५. बड़ों के सामने ढिठाई आदि न प्रकट हो, इस बात का ध्यान । संमान या मर्यादा का ध्यान । अदब का खयाल । जैसे,—बड़ों का लिहाज रखा करो ।
६. लज्जा । शर्म । हया । क्रि॰ प्र॰—आना ।—करना ।—रखना । मुहा॰—लिहाज उठना या टूटना=लिहाज न रहना । मर्यादा, संमान आदि का ध्यान न रहना । उ॰—अब लिहाज टूट गया । शर्म मंजिलों दूर है ।—फिसाना॰, भा॰ ३, पृ॰ १४८ ।