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लुरना

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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लुरना पु † क्रि॰ अ॰ [सं॰ लुलन(=झूलना)]

१. ऊपर से नीचे तक चली आई हुई वस्तु का इधर उधर हिलना ड़ोलना । लटकना । झूलना । लहरना । उ॰— (क) छतियाँ पर लोल लुरैं अलकै सिर फूल अरुझि सों यों दुति है ।— (शब्द॰) । (ख) झपकैं पलकैं बिथुरी अलकैं अरु हार लुरै मुकुता गल में ।— सुंदर (शब्द॰) ।

२. ढल पड़ना । झुक पड़ना । टूट पड़ना ।

३. कहीं से एकबारगी आ जाना । उ॰— ब्रह्म की बिझूति, करतू त विश्वकर्मा की, साहिबी सकल पुरहूत की लूरै परी ।— (शब्द॰) । संयो॰ क्रि॰—पड़ना ।

४. आकर्षित होना । लुभा जाना । लट्टू होना । प्रवृत्त होना । उ॰— संग ही संग बसौ उनके, अँग अंगन देव तिहारे लुरी है ।— देव (शब्द॰) । संयो॰ क्रि॰—पड़ना ।