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लोकालोक

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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लोकालोक संज्ञा पुं॰ [सं॰] पुराणानुसार एक पर्वत का नाम । चक्रवाल । विशेष—कहते हैं, यह सातो समु्द्रों और द्धीषों की चारों ओर से आवेष्ठित किए हुए हैं, जिसके बाहर सूर्य या चंद्र का प्रकाश नहीं पहुचता । बौद्ध ग्रंथों में इसे चक्रवाल कहा है ।