लोटना
प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]लोटना ^१ क्रि॰ अ॰ [सं॰ लुण्ठन]
१. भूमि पर या किसी ऐसे ही आधार के सहारे, उसे स्पर्श करते हुए, ऊपर नीचे होते हुए किसी का एक स्थान से दुसरे स्थान की ओर जाना या गमन करना । सीधे और उलटे लेटते हुए किसी ओर को जाना । उ॰—(क) परी क्या भुँइ लोटै कहँ रे जीव बिनु भीव । को उठाय बैठारै वाज पियारे जीव ।—जायसी (शब्द॰) । (ख) काम नारि अति लोटत फिरै । कंत कंत कहि छति भुज भरे ।—लल्लू (शब्द॰) ।
२. लुढ़कना । उ॰—जानहुँ लोटहिं चढ़े भुअंगा । बेधी बार मलय गिरि अंगा ।—जायसी (शब्द॰) ।
३. कष्ट से करवट बदलना । तड़पना । क्रि॰ प्र॰—जाना । मुहा॰—लोट जाना = (१) बेसुध होना । बेहोश हो जाना । (२) मर जाना । जैसे,—एक ही वार में पाँच कबुतर लोट गए ।
४. विश्राम करना । लेटना । मुहा॰—लोट पोट करना = लेटना । विश्राम करना ।
५. मुग्ध देखि प्रभु बोलन भये ।—रघुनाथ (शब्द॰) ।
लोटना ^२ स्त्री॰ स्त्री॰ [सं॰] दाक्षिण्य । सौजन्य । शिष्टता । शालीनता [को॰] ।