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लोढ़ा

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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लोढ़ा संज्ञा पुं॰ [सं॰ लोष्ठ] [स्त्री॰ अल्पा॰ लोढिया]

१. पत्थर का वह गोल लंबोतरा टुकड़ा जिससे सिल पर किसी चीज को रखकर पीसते हैं । बट्टा । उ॰—फोरहिं सिल लोढ़ा सदन लागे अढुकि पहार । कायर कूर कपूत कलि घर घर सहर डहार ।— तुलसी (शब्द॰) । मुहा॰—लोढ़ा डालना = बराबर करना । उ॰—घूमि चहुँ दिसि झूमि रहे घन बूँदन ते छिति डारत लोढ़े ।—रघुनाथ (शब्द॰) । लोढ़ाढाल = चौपट । सत्यानाश । उ॰—विष्णु कलोहल रव कहिं कोप कियो विकराल । झटकि पटकि झट लटकि कसि कीन्हो लोढ़ाढाल ।—(शब्द॰) ।

२. बुंदेलखंड के बराबर नामक हल का एक अंश । विशेष—यह हल मोटी लकड़ी का होता है । इसमें दत्तुआ या लोहे की कीलें लगी होती हैं, जिनमें पास लगाया जाता है ।