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ल्यारी

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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ल्यारी † संज्ञा पुं॰ [देश॰] भेड़िया । उ॰—श्रीकृष्णचंद्र ने मुसकरा के कहा—बहुत अच्छा, तू बन भेड़िया और सब ग्वाल बाल होंवे मेढा़ । सो सुनते ही व्योमासुर तो फूलकर ल्यारी हुआ और ग्वाल बाल सब बने मेढ़े ।—लल्लू (शब्द॰) ।