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वज्रलेप

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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वज्रलेप संज्ञा पुं॰ [सं॰] एक मसाला या पलस्तर जिसका लेप करने से दीवार, मुर्ति आदि अत्यंत द्दढ़ और मजबूत हो जाती हैं । विशेष—यह दो तरह से बनता है । एक में तो तेंदू और कैथ के कच्चे फल, सेमल के फूल, शल्लकी (सलई) के बीज, धन्वन की छाल और बच को लेकर एक द्रोण पानी में उबालते हैं । जब जलकर आठवाँ भाग रह जाता है, तब उसे उतारकर उसमें गंधाबिरोजा, बोल, गूगल, भिलावाँ, कुंदुरु, गोंद, राल, अलसी और बेल का गूदा घोटकर मिलाते हैं । दूसरा मसाला इस प्रकार है—लाख, कुंदुरु, गोंद, बेल का गूदा, गँगेरन का फल, तेंदू का फल, महूए का फल, मजीठ, राल, बोल और आँवला इन सबको द्रोण भर पानी में उबालते हैं । जब अष्टमांश रह जाता है, तब काम में लाते हैं ।