वपुष्टमा
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]वपुष्टमा संज्ञा स्त्री॰ [सं॰]
१. पझचारिणी लता ।
२. हरिवंश के अनुसार काशिराज की एक कन्या, जो परीक्षित के पुत्र जनमेजध से ब्याही थी । विशेष—हरिवंश में लिखा है कि राजा जनमेजय ने एक अश्वमेध यज्ञ किया । उनकी पत्नी, वपुष्टमा साथ ही बैठी थी । इंद्र ने अश्व के शरीर में प्रविष्ट होकर उसके साथ सहवास किया । जब मरा हुआ अश्व जीवित दिखाई पड़ा, तब इंद्र की चाल का पता लगा । जनमेजय ने कुद्ध होकर इंद्र को शाप दिया कि अब से अश्वमेध में तुम्हारा कोई पूजन न करेगा । उन्होंने ऋत्विक् ऋषयों को भी देश से निकाल दिया और वपुष्टमा का भी तिरस्कार किया । उसी समय गंधर्वराज विश्वावसु ने आकर राजा को समझ या कि इंद्र ने तुम्हारे अश्वमेध यज्ञों से डरकर रंभा अप्सरा को वपुष्टमा का शरीर धारण करा के भेजा है । ऋत्विजों को निकालने से तुम्हारा अश्वमेध का पुण्य क्षीण हो गया ।