व्य़ुत्थान
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]व्य़ुत्थान संज्ञा पुं॰ [सं॰]
१. स्वतंत्र या स्वाधीन होकर काम करना ।
२. किसी के विरुद्ध आचरण करना । खिलाफ चलना ।
३. रूकावट ड़ालना । रोकना ।
४. समाधि ।
५. एक प्रकार का नृत्य ।
६. योग के अनुसार चित्त की क्षिप्त, मूढ़ और विक्षिप्त ये तीन अवस्थाएँ या चित्तभूमियाँ जिनमें योग का साधन नहीं हो सकता । इन भूमियों में चित्त बहुत चंचल रहता है ।
७. महत सक्रियता । सचेष्टता (को॰) ।
८. हाथी को उठने के लिये प्रेरित करना (को॰) ।
९. किसी से दबना या नीचा देखना (को॰) ।
१०. खंड़न । विरोध (को॰) ।