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व्रज्य़ा

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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व्रज्य़ा संज्ञा स्त्री॰ [सं॰]

१. घूमना । फिरना । पयटन । प्रव्रजन । उ॰— सुरलोक जहा नगण्य हे वह व्रज्या व्रत धन्य धन्य है ।— साकेत, पृ॰३५८ ।

२. गमन । जाना ।

३. आक्रमण । चढ़ाई ।

४. एक हो तरह की बहुत सी चीजें एक जगह एकत्र करना ।

५. दल ।

६. रंगभूमि । नाट्यशाला ।

७. जात । वर्ग श्रणी (को॰) ।