शंतनु

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

शंतनु पु संज्ञा पुं॰ [सं॰ शन्तनु] दे॰ 'शांतनु' ।—(क) वरणी शंतनु की कथा, पुनि ययाति कर भोग ।—रघुनाथ (शब्द॰) । (ख) बिष्णूसुता सत्य सुत माहीं । तासु पुत्र शंतनु नृप आहीं ।—सबल (शब्द॰) ।