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शतपथ

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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शतपथ वि॰ [सं॰]

१. असंख्य मार्गोवाला ।

२. बहुत सी शाखाओंवाला ।

शतपथ ब्राह्मण संज्ञा पुं॰ [सं॰] यजुर्वेद का एक ब्राह्मण । विशेष—इसके कर्ता महर्षि याज्ञवल्कय माने जाते हैं । इसकी माध्यंदिन और काण्व शाखाएँ मिलती हैं । इनमें से पहली की विशेष प्रतिष्ठा है । एक प्रणाली के अनुसार इसमें ६८ प्रपाठक हैं, और दुसरी के अनुसार यह १४ कांड़ों और १०० अध्यायों में विभक्त है । चारों ब्राह्मणों में से यह अधिक क्रमपूर्ण और रोचक है । इसमें अग्निहोत्र से लेकर अश्वमेध पर्यत कर्मकांड का बड़ा विशद और सुंदर वर्णन है ।