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शतविघ

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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शतविघ वि॰ [सं॰] सौ या अनंत प्रकार का । उ॰—शंकर, जय कृष्ण, राम, शतविध, नामानुबंध, बांधव है निराकर ।— आरोधना, पृ॰ ६७ ।