शनि

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हिन्दी

संज्ञा

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  1. ग्रह

अनुवाद

प्रकाशितकोशों से अर्थ

शब्दसागर

शनि संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. सौर जगत् के नौ ग्रहों में से सातवाँ ग्रह । शनैश्चर । विशेष—सूर्य से इस ग्रह का अंतर ८८३, ॰॰०,॰॰० मील अथवा पृथ्वी के अंतर से ९ १/२ गुना है । इसका व्यास७५८०० मील का है । प्रति सेकेंड ६ मील की चाल से सूर्य की परिक्रमा में इसको २९ वर्ष और १६७ दिन अर्थात् कुल १०७५९ दिन लगते हैं । इसका ताप १५ सें ॰ है । बृहस्पति को छोड़कर यह सबसे बड़ा ग्रह है पृथ्वी से इसका व्यास ९ गुना, विस्तार ६९७ गुना और मान ९३ गुना है । इसके साथ नौ उपग्रह या चंद्रमा हैं । जिनमें एक उपग्रह 'टाइटेन' बुध ग्रह से भी बड़ा है । बृहस्पति से छोटा होने पर भी यह सब ग्रहों से अधिक चमक दार है, जिससे इसका आकार सबसे बड़ा प्रतीत होता है । यह ग्रह ३७८ दिन में एक बार अपनी धुरी पर घुमता है । यह ग्रह विचित्र आकार का है । इसके बाहर चारों ओर कम से कम ३ एककैंद्रीय बहुत बड़े वलय है; और उस बाह्य वलय से इसके पिंड की दुरी ५,९०० मील है । इसके बाह्य वलय की चौड़ाई ११,२०० मील है । उस वलय का व्यास १,७२,८०० मील और मोटाई सौ मील से कुछ कम है । इस ग्रह पर पृथ्वी जैसा जीवन संभव नहीं हैं । फलित ज्योतिष के अनुसार यह ग्रह काले रंग का, शूद्र वर्ण औऱ सूर्यमुख है तथा इसका वाहन गृध्र है । यह सौराष्ट्र देश का स्वामी, नपुंसक (मंदगामी) और तमोगुण से युक्त तथा कषाय रस का अधिपति है । यह मकर और कुंभराशि तता नीलकांत मणि (नीलन) का बी अधिपति है । यह चतुर्भुज है और इसके हाथों में बाण, शूल, धनुष और भल्ल है । इसके अधिपति देवता यम और प्रत्यधिदेवता प्रजापति हैं । इसका परिमाण चार अंगुल है । पद्यपुराण के अनुसार सूर्य की स्त्री छाया के गर्भ से इसकी उत्पत्ति हुई थी । अपनी स्त्री के शाप से इसकी द्दष्टि क्रूर हो गई और पार्वती के शाप के कारण यह खंज हो गया । इसे कश्यप मुनि की संतान भी मानते हैं । फलित के अनुसार शनि का फल इस प्रकार है यह पापग्रह और अशुभ फल का देनेवाला है, परंतु राशि और स्थानविशेष में शुभ फल भी प्रदान करता है । शनि और मंगल दोनों ग्रह स्थानविशेष पर एक साथ होने से राजयोग कारक होते हैं । यह भी माना जाता है कि लोगों पर जो भारी विपत्तियाँ आती हैं; वे प्रायः इसी की कुद्दष्टि के कारण होती हैं । इसका फल साढ़े सात दिन, साढ़े सात मास या साढ़े सात वर्ष तक रहता है । पर्या॰—सौरि । शनिश्चर । नीलवासा । मंद । छायात्मज । पातगि । ग्रहनायक । छायासुत । भास्करी । नीलांबर । आर । क्रोड़ । वक्र । कोल । सप्रांशु । पंगु । काल । सूर्यपुत्र । असित ।

२. शिव का एक नाम (को॰) ।

३. दुर्भाग्य । अभाग्य । बद- किस्मती ।

४. दे॰ 'शनिवार' ।

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