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शरीफा

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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शरीफा संज्ञा पुं॰ [सं॰ श्रीफल या सीताफल]

१. मझाले आकार का एक प्रकार का प्रसिद्ध फलवाला वृक्ष । विशेष—यह वृक्ष प्रायः सारे भारतवर्ष में फल के लिये लगाया जाता है और मध्य तथा पश्चिमी भारत के जंगली प्रेदशों में बहुत अधिकता से पाया जाता है । कहते है, यह वृक्ष वेस्ट- इंडीज से यहाँ आया है । इस वृक्ष की छाल पतली और खाकी रंग की, और लकड़ी कुछ मटमेलापन लिए सफेद रंग की होती है । इसके फल अमरूद के फल के सदृश, अंडकार तथा अनीदार होते हैं । इसमें एक प्रकार के त्रिदल फूल लगते हैं जो नीचे की और झुके हुए होते हैं । ये फूल तरकारी बनाने के काम में आते हैं । यह वृक्ष गरमी के दिनों में फूलता है और कार्तिक अगहन में इसमें अमरूद के आकार के खाकी रंग के गोल फल लगते हैं । यह वृक्ष बीजों से उगता है और बहुत जल्दी बढ़कर फूलने लगता है । इसके पौधे जब कुछ बड़े हो जाते हैं, तब उखाड़कर दूसरे स्थान पर रोपे जोते हैं । इसकी छाल, जड़ और पत्तियों का व्यवहार औषोधों में होता हैं । इसकी छाल बहुत दस्तावर होती है । इसके बीज में से एक प्रकार का तेल भी निकलता है और इसमें तीन तरह के गोंद भी लगते हैं ।

२. इस वृक्ष का फल जो अमरूद के सदृश गोल और खाकी रंग का होता है । श्रीफल । सीताफल । रामसीता । विशेष—इसके तल पर आँख के आकार के बड़े बड़े दाने होते हैं जिनके अंदर सफेद गूदे में लिपटे हुए काले लंबोतरे बीज होते हैं । इसका गूदा बहूत मीठा होता है; और इसी के लिये यह फल खाया जाता है । अकाल के दिनों मे गरीब लोग प्रायः जंगली शरीफे के फल खाकर निर्वाह करते हैं । वैद्यक में इसे मधुर, हृदय के लिये हितकारी, बलवर्धक, वातकारक, शक्तिवर्धक, तृप्तिकारक, मांसवर्धक और दाह, पित्त, रक्तपित्त, प्यास, वमन, रुधिरविकार आदि के लिये लाभदायक माना है ।