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शरीरधर्म

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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शरीरधर्म संज्ञा पुं॰ [अ॰ शरीर + धर्म] चेष्टा । शरीरगत लक्षण । अनुभाव । (अं॰ लिम्टम्स) । उ॰—वह एक वृत्तिचक्र है, जिसके अंतर्गत प्रत्यय, अनुभूति, इच्छा, गति या प्रवृत्ति, शरीरधर्म सबका योग रहता है ।—चिंतामणि, भा॰ २, पृ॰ ८८ ।