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शल्यज

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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शल्यज वि॰ [सं॰] व्रण या घाव आदि से उत्पन्न ।

शल्यज नाडीव्रण संज्ञा पुं॰ [सं॰] नाड़ी में होनेवाला एक प्रकार का व्रण या घाव । विशेष—जब किसी घाव में काँटा या कंकड़ आदि पड़कर किसी नाड़ी में पहुँच जाता और वहीं रह जाता है, तब जो व्रण होता है, वह शल्यज नाड़ीव्रण कहलाता है । इसमें घाव में से गरम खून के साथ मवाद निकलता है ।

शल्यज मूत्रकृच्छ संज्ञा पुं॰ [सं॰] एक प्रकार का मूत्रकृच्छ । विशेष दे॰ 'मूत्रकृच्छ' ।