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शहरग

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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शहरग सं॰ पुं॰ [फ़ा॰ शाहरग का संक्षिप्त रूप] शरीर की सबसे बड़ी रग या नाड़ा जो हृदय में मिलता है । सुषुम्ना । सुखमना । उ॰—क्या भटकता फिर रहा तू है तलाश यार में । रास्ता शहरग में है दिलवर पै जाने के लिये ।—तुलसी॰ श॰, पृ॰ ५ । यौ॰—शहरखवरा = घर घर की या पूरे नगर का हाल चाल रखनेवाला । शहरगश्त, शहरगिर्द = (१) पतरौल । (२) शहर में घूमनेवाला । शहरदार = नगर का निवासी । शहरपनाह । शहरबंद । शहरबदर = दे॰ 'शहर बदल' । शहह व शहर = (१) एक से दूसरे नगर तक । (२) स्थान स्थान में । जगह जगह । शहरबाश = शहरी । नागरिक । शहरयार । शहरयारी । शहरशमला = जहाँ न्याय की जगह अन्याय होता हो । अँधेर नगरी ।