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शालग्राम

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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शालिग्राम संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. विष्णु की एक प्रकार की मूर्ति जो पत्थर की होती है और नारायणी नदी में पाई जाती है । विशेष—यह मूर्ति प्रायः पत्थर की गोलियों या बटियों आदि के रूप में होती है और उसपर चक्र का चिह्न बना होता है जिसे लोग साधारण बोलचाल की भाषा में जनेऊ कहते हैं । जिस शिला पर यह चिह्न नहीं होता वह पूजन के लिये उपयुक्त नहीं मानी जाती । लोग अन्य देवमूर्तियों की भाँति इसकी भी पहले प्रतिष्ठा करते हैं । और तब इसका पूजन करते हैं । अनेक पुराणों में इसकी पूजा का माहात्म्य मिलता है ।

२. बड़ी गंडकी या नारायणी नदी के किनारे का एक गाँव । विशेष—इस गाँव के समीप शाल के वृक्ष बहुत अधिकता से हैं । इस गाँव के पास ही नदी में शालिग्राम शिलाएँ भी पाई जाती हैं । वैष्णव लोग इस गाँव को बहुत पवित्र मानते हैं ।